दिगम्बर जैन धर्मावलंबियो द्वारा मनाये जा रहे पर्यूषण महापर्व का चौथा दिन
दिगम्बर जैन धर्मावलंबियो द्वारा मनाये जा रहे पर्यूषण महापर्व का चौथा दिन
"लोभ पर विजय पाना ही उत्तम शौच धर्म "
उत्तम क्षमा और उत्तम मार्दव एवं उत्तम आर्जव के समान ही उत्तम शौच भी आत्मा का स्वभाव हैं आत्मा लोभ रूपी मल से मलिन हो रखी हैं उसे पवित्र करना तथा करने के भाव आना ही शौच धर्म हैं l लोभ चार प्रकार के होते हैं जीवन का लोभ, निरोगता का लोभ, इन्द्रियो का लोभ, भोग्य सामग्री का लोभ का अत्यन्त अभाव हो जाना ही शौच धर्म हैं l
पर्यूषण महापर्व पर चौथे दिन धर्म के दशलक्षणो को अधिक परिभाषित करते हुए दिगम्बर जैन समाज पिपलाई के सदस्य बृजेन्द्र जैन बताया की दूसरे का वैभव, ऐश्वर्य, यश,ज्ञान ,पुण्य का उदय, प्रभाव, स्त्री ,संतान, संपत्ति आदि को देख कर ईष् र्या नही रखना, अपनी अत्यन्त ही दुर्लभ इस मनुष्य पर्याय मे जो है जितना हैं उसी मे संतोष कर अशुभ भावो का अभाव करके आत्मा की शुचि ही मोक्ष का मार्ग हैं l
समाज के लोगो ने उत्तम सोच धर्म को अच्छे ढंग से समझकर अपने जीवन मे उतारने का संकल्प लिया l प्रात :काल मुकेश जैन, सुनील जैन द्वारा प्रात :श्री जी का अभिषेक और शान्तिधारा की गई l
आर. सी. जैन ने बताया की पर्यूषण पर्व को आत्मशुद्धि का पर्व, त्याग का पर्व और पर्वो का राजा कहा जाता है इस पर्व मे बच्चो से लेकर वयोवृद्ध श्रावक – श्राविकाएं तक व्रत ,पूजन, तप, साधना, संयम उपवास करते हैं पर्व की उत्सुकता अधिक होती हैं l
प्रेषक
जिनेन्द्र जैन
प्रवक्ता
सकल दिगम्बर जैन समाज पिपलाई
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