21वीं सदी में अक्षय तृतीया पर शोक मनाने की परंपरा चौथ का बरवाड़ा

21वीं सदी में शोक मनाने की परंपरा चौथ का बरवाड़ा
संपूर्ण देश में आज का अक्षय तृतीया का दिन शादी विवाह व मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है लेकिन लॉक डाउन को लेकर परेशानी बनी हुई है परंतु चौथ का बरवाड़ा तथा उसके आसपास के 18 गांवों में अक्षय तृतीया पर शोक मनाने की परंपरा सालों से चली आ रही है! जिस दिन देश में सबसे ज्यादा शादी विवाह होते हैं वहीं इस क्षेत्र में सन्नाटा छाया रहता है आज के दिन मंदिरों में घंटियां नहीं बजती है लोग इस दिन घरों में सब्जियां तक नहीं बनाते हैं !अक्षय तृतीया पर इस क्षेत्र में शोक मनाने की परंपरा ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है इस विषय पर इतिहास के जानकार व पेंशनर समाज के अध्यक्ष शरीफ अहमद से इस विषय पर जानकारी दी
संवाददाता राजेंद्र प्रसाद
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